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कोरोना काल
इंसान की बस्ती में एक अदृश्य मेहमान आ जाएगा,
सोचा न था वो ऐसा दिन भी दिखलाएगा।
साथ छोड़ना उन
दोस्तों का, बनेगी ज़िन्दगी की ज़रूरत,
थी जिनसे हमारी महफिले खूबसूरत।
इंसान की बस्ती में एक अदृश्य मेहमान आ जाएगा,
सोचा न था वो ऐसा दिन भी दिखलाएगा।
सड़को पर पसरा सन्नाटा चीख चीख कर बतलाएगा,
पराजित हो चूका गुमान तेरे इंसान होने का,
अपने शहरो की यह शून्यता तू जीवन भर न भूल पाएगा।
इंसान की बस्ती में एक अदृश्य मेहमान आ जाएगा,
सोचा न था वो ऐसा दिन भी दिखलाएगा।
न देखि थी ऐसी असीम शक्ति एक अगोचर जीव की,
पाबंदियों से सजी रहे दुनिया यह तेरी यह चाह है
उसकी,
इस चाह को तू आत्मविश्वास से हराएगा।
विपदाओं का यह दौर एक दिन काट जाएगा इंसान की बस्ती से जब यह मेहमान अदृश्य हो जाएगा।।
रचयिता नेहा
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